काल बनकर बरसी बरसात, 44 की टूटी जीवन की डोर
इस बार गिरते पहाड़ और उफनती नदियों ने मचाई तबाही
आशियाने तो छीने पर अपनों को भी साथ ले गई तबाही
अब तक बरसात में 44 की मौत, 2 लोग लापता
गौरीशंकर
कुल्लू। अबकी बार बरसात राहत नहीं, बल्कि काल बनकर बरसी। किसी का घर डूबा.... किसी की जमीन बह गई तो किसी का जीवन सदा-सदा के लिए खामोश हो गया। मानसून के इस डरावने कहर ने 44 जिंदगियों की सांसें बंद कर दी। लगातार हुई बारिश से पहाड़ों से लेकर मैदानों तक तबाही का मंजर देखने को मिला। कहीं गिरते पहाड़ों के नीचे सपने दब गये तो कहीं उफनती नदियों में जिंदगियां बह गई। मानसून जो कभी जीवन और हरियाली का प्रतीक था, इस बार मौत और मातम का प्रर्याय बन गया। पीछे रह गये उजड़े घर, सूनी आंखें और खामोशी, जो वर्षों तक प्रभावितों के दिलों को कचोटती रहेगी। जिला कुल्लू में इस तरह की मंजर देखने को मिल रहा है।
अबकी बरसात जिला में 44 लोगों को सदा के लिए खामोश कर गया। भारी बारिश के चलते अब तक मानसून सीजन बाढ़, भूस्खलन के साथ फिसलने और सड़क दुर्घटनाओं में लोगों की मौत हुई है। इन हादसों में कई परिवार का घर चलाने वाला तो किसी के घर का चिराग बुझ गया। इसके चलते यह मानसून सीजन परिवारों को कभी न मिटने वाला दर्द दे गया है। जबकि दो लोग ऐसे हैं जो अभी लापता चल रहे हैं। सैंज के जीवा नाला में बादल फटने के कारण आई बाढ़ में बहे भाई-बहन का अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है।
--इन हादसों ने झकझोरा दिल
इस दौरान जहां निरमंड के शमारनी में एक ही परिवार के पांच सदस्य सदा-सदा के लिए दुनिया से रूखसत होकर परिजनों को कभी न मिटने वाले जख्म दे गए। तो वहीं जिला मुख्यालय कुल्लू के इनर अखाड़ा बाजार में आठ कामगारों की जिंदगी भी सदा के लिए खामोश कर दी और साथ में एक महिला और एनडीआरएफ के जवान ने भी जिंदगी गवाईं। रमणीक होटल के पास महिला मलबे में दब गई। जबकि सैंज के बिहाली में बाढ़ में बहे तीन में से सिर्फ एक लड़की का शव बरामद हुआ दो अभी भी लापता चल रहे हैं।
हादसे मौत
भूस्खलन 20
फिसलन 05
बाढ़ 01
गिरने से 01
सड़क हादसे. 13
डूवने से 03
श्रीखंड यात्रा. 01
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कुल 44
इस बार की बरसात में अब तक मरने वालों की संख्याा 44 पहुंच चुकी है जबकि दो अभी लापता चल रहे हैं। मृतक के परिजनों को राहत मैन्यू के हिसाब से राहत प्रदान करने का कार्य चल रहा है।
गणेश ठाकुर, जिला राजस्व अधिकारी।
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