महिलाओं ने डाली महा नाटी, लोक रंगों में सराबोर हुआ मनाली
130 महिला मंडलों की 1100 महिलाओं ने डाली महा नाटी, लोक रंगों में सराबोर हुआ मनाली
राइट बैंक–लेफ्ट बैंक की महिलाओं के बीच रोमांचक सांस्कृतिक प्रतिस्पर्धा
मनाली।
राष्ट्रीय विंटर कार्निवाल के दूसरे दिन मनाली की फिज़ाओं में लोक संस्कृति का ऐसा रंग घुला कि जश्न दोगुना हो गया। माल रोड पर राइट बैंक के 130 महिला मंडलों की लगभग 1100 महिलाओं ने एक साथ महा नाटी डालकर समूचे मनाली को थिरकने पर मजबूर कर दिया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर धुनों और लोकगीतों की गूंज से पूरा क्षेत्र सांस्कृतिक उत्सव में बदल गया।
महा नाटी के दौरान महिलाओं की पारंपरिक वेशभूषा दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रही। पट्टू, धाठू, गले में सजी चांदी की चंद्रहार, सोने का पातकू, गोखडू, बाजूबंद और पाजेब—हर आभूषण हिमाचली लोक विरासत की जीवंत पहचान बनकर झलक रहा था। यह प्रस्तुति केवल नृत्य नहीं, बल्कि महिला सशक्तीकरण और सांस्कृतिक गौरव का सशक्त संदेश भी दे रही थी।
नाटी में उमड़ी महिलाओं की अपार भीड़ और उनकी एकरूप लय को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वर्गलोक की देवियां धरती पर उतर आई हों। हर कदम, हर ताल पर उत्साह और उल्लास साफ झलक रहा था। महा नाटी विंटर कार्निवाल का सबसे बड़ा आकर्षण बनकर उभरी और माहौल पूरी तरह उत्सवमय हो गया।
इस अवसर पर विधायक भुवनेश्वर गौड ने सभी प्रतिभागी महिलाओं को विंटर कार्निवाल की शुभकामनाएं देते हुए उनकी भव्य प्रस्तुति की मुक्त कंठ से सराहना की। वहीं कार्निवाल कमेटी के उपाध्यक्ष एवं एसडीएम मनाली रमन शर्मा ने कहा कि कार्निवाल को सफल और यादगार बनाने के लिए प्रशासन व आयोजन समिति हर स्तर पर निरंतर प्रयास कर रही है।
गौरतलब है कि 23 जनवरी को लेफ्ट बैंक की महिलाएं अपनी महा नाटी प्रस्तुति देंगी। इससे राइट बैंक और लेफ्ट बैंक की महिलाओं के बीच चल रही यह सांस्कृतिक प्रतिस्पर्धा और भी रोमांचक होने की उम्मीद है, जो विंटर कार्निवाल के उत्साह को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।
----इतिहास की पृष्ठभूमि : लोक परंपरा से उत्सव तक
नाटी हिमाचल प्रदेश की सबसे प्राचीन और पहचान बनी लोकनृत्य परंपरा है। इसका उल्लेख सदियों पुराने जनश्रुतियों और लोकगाथाओं में मिलता है। कुल्लू–मनाली अंचल में नाटी केवल नृत्य नहीं, बल्कि सामूहिक एकता, सामाजिक समरसता और उत्सव की आत्मा मानी जाती है। विवाह, देव मेलों, फसली त्योहारों और विशेष अवसरों पर नाटी डालने की परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है।
महा नाटी की अवधारणा इसी परंपरा का विस्तारित रूप है, जिसमें सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों लोग एक साथ एक ही लय में थिरकते हैं। यह सामूहिक नृत्य हिमाचली समाज की एकजुटता, अनुशासन और सांस्कृतिक चेतना को दर्शाता है। वर्ष 2016 में कुल्लू जिले में आयोजित महा नाटी ने विश्व स्तर पर पहचान बनाई, जब इसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। इसके बाद महा नाटी हिमाचल के बड़े आयोजनों की स्थायी पहचान बन गई।
---मनाली विंटर कार्निवाल का इतिहास
मनाली का राष्ट्रीय विंटर कार्निवाल वर्ष 1968 में स्थानीय युवाओं और पर्यटन से जुड़े लोगों की पहल पर शुरू हुआ। इसका उद्देश्य सर्दियों के मौसम में पर्यटन को बढ़ावा देना और हिमाचली लोकसंस्कृति को राष्ट्रीय मंच प्रदान करना था। समय के साथ यह आयोजन केवल स्थानीय उत्सव न रहकर राष्ट्रीय पहचान का सांस्कृतिक महोत्सव बन गया।
हर वर्ष आयोजित होने वाला यह कार्निवाल लोकनृत्य, लोकगीत, शीतकालीन खेल, साहसिक गतिविधियों और सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का अनूठा संगम है। इसमें राइट बैंक और लेफ्ट बैंक के बीच पारंपरिक प्रतिस्पर्धा कार्निवाल की विशेष पहचान रही है, जो आयोजन को रोमांच और उत्साह से भर देती है।
आज मनाली विंटर कार्निवाल केवल उत्सव नहीं, बल्कि हिमाचल की जीवंत सांस्कृतिक विरासत, महिला सहभागिता और सामाजिक एकता का प्रतीक बन चुका है।
--मनाली विंटर कार्निवाल : इतिहास की झलक
मनाली का विंटर कार्निवाल हिमाचल प्रदेश का एक प्रमुख शीतकालीन सांस्कृतिक उत्सव है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1968 में हुई। उस समय मनाली में सर्दियों के मौसम में पर्यटन लगभग ठप हो जाता था। स्थानीय युवाओं, पर्यटन कारोबारियों और प्रशासन ने मिलकर एक ऐसे आयोजन की कल्पना की, जो ठंड के मौसम में भी पर्यटकों को आकर्षित कर सके और साथ ही स्थानीय लोकसंस्कृति को मंच मिल सके।
शुरुआत में यह आयोजन छोटे स्तर पर लोकनृत्य, खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित था, लेकिन समय के साथ इसका स्वरूप व्यापक होता चला गया। धीरे-धीरे लोकनृत्य, लोकगीत, शीतकालीन खेल, साहसिक गतिविधियाँ, फैशन शो, फूड फेस्टिवल और सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ इसका अभिन्न हिस्सा बनती गईं।
विंटर कार्निवाल की सबसे अनोखी और चर्चित परंपरा राइट बैंक और लेफ्ट बैंक के बीच होने वाली सांस्कृतिक प्रतिस्पर्धा है। यह परंपरा आयोजन में रोमांच भरने के साथ-साथ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और आपसी भाईचारे का संदेश देती है।
आज मनाली विंटर कार्निवाल को राष्ट्रीय स्तर की पहचान प्राप्त है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक इस उत्सव को देखने मनाली पहुंचते हैं। यह कार्निवाल न केवल पर्यटन को बढ़ावा देता है, बल्कि हिमाचल की समृद्ध लोकसंस्कृति, महिला सहभागिता और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक बन चुका है।
Comments
Post a Comment