Posts

कुल्लू नगर परिषद करवाएगा दो सौ कुत्तों की नसबंदी

नप कुल्लू ने टेंडर प्रक्रिया शुरू की, जल्द होगा कार्य शुरू कोर्ट के आदेश के बाद नगर परिषद ने तेज की कावायद कुल्लू।  नगर परिषद कुल्लू ने शहर में भटकते लावारिस कुत्तों की समस्या को लेकर हरकत में आना शुरू कर दिया है। नगर परिषद ने लावारिस कुत्तों की जन्म संख्या पर नियंत्रण करने के लिए कुत्तों की नसबंदी करने की योजना बनाई है। इसके तहत दो सौ कुत्तों की नसबंदी करने के लिए टेंडर लगाने की प्रक्रिया आरंभ कर दी है। हालांकि दो वर्ष पहले भी कुल्लू नगर परिषद ने दो सौ कुत्तों की नसबंदी एक संस्था के जरिए की थी लेकिन अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद फिर से नगर परिषद ने लावारिस कुत्तों की जन्म संख्या नियंत्रित करने की दिशा में प्रयास शुरू कर दिये हैं। नगर परिषद ने शहर के अंतर्गत आने वाले 200 कुत्तों की नसबंदी करने के लिए टेंडर प्रक्रिया आरंभ कर दी है। हालांकि अभी तक नगर परिषद के पास शहर की गलियों में लावारिस कुत्तों की संख्या को लेकर कोई पुख्ता आंकड़ा नहीं है लेकिन दो सौ कुत्तों की नसबंदी करने से काफी हद तक इनकी जन्म संख्या का नियंत्रित करने में सहायता मिल सकेगी। गौरतलब है कि नगर परिषद क्षेत्र कुल्लू में ...

महिलाओं ने डाली महा नाटी, लोक रंगों में सराबोर हुआ मनाली

Image
130 महिला मंडलों की 1100 महिलाओं ने डाली महा नाटी, लोक रंगों में सराबोर हुआ मनाली राइट बैंक–लेफ्ट बैंक की महिलाओं के बीच रोमांचक सांस्कृतिक प्रतिस्पर्धा मनाली। राष्ट्रीय विंटर कार्निवाल के दूसरे दिन मनाली की फिज़ाओं में लोक संस्कृति का ऐसा रंग घुला कि जश्न दोगुना हो गया। माल रोड पर राइट बैंक के 130 महिला मंडलों की लगभग 1100 महिलाओं ने एक साथ महा नाटी डालकर समूचे मनाली को थिरकने पर मजबूर कर दिया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर धुनों और लोकगीतों की गूंज से पूरा क्षेत्र सांस्कृतिक उत्सव में बदल गया। महा नाटी के दौरान महिलाओं की पारंपरिक वेशभूषा दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रही। पट्टू, धाठू, गले में सजी चांदी की चंद्रहार, सोने का पातकू, गोखडू, बाजूबंद और पाजेब—हर आभूषण हिमाचली लोक विरासत की जीवंत पहचान बनकर झलक रहा था। यह प्रस्तुति केवल नृत्य नहीं, बल्कि महिला सशक्तीकरण और सांस्कृतिक गौरव का सशक्त संदेश भी दे रही थी। नाटी में उमड़ी महिलाओं की अपार भीड़ और उनकी एकरूप लय को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वर्गलोक की देवियां धरती पर उतर आई हों। हर कदम, हर ताल पर उत्साह और उल्लास स...

मनाली विंटर कार्निवल: बर्फ की गोद में संस्कृति और पर्यटन का उत्सव

Image
मनाली। हिमाचल प्रदेश की पर्यटन नगरी मनाली इन दिनों एक बार फिर रंगों, लोकसंस्कृति और रोमांच से सराबोर है। प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला मनाली विंटर कार्निवल न केवल शीत ऋतु के पर्यटन को बढ़ावा देता है, बल्कि यह हिमाचली संस्कृति, परंपरा और कला का जीवंत प्रदर्शन भी है। इस उत्सव के दौरान मनाली की वादियाँ लोकनृत्य, लोकगीत, पारंपरिक वेशभूषा, साहसिक खेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से गूंज उठती हैं। देश-विदेश से आए पर्यटक बर्फ से ढकी पहाड़ियों के बीच इस अनूठे उत्सव का आनंद लेते हैं। *** विंटर कार्निवल का इतिहास मनाली विंटर कार्निवल की शुरुआत 1977 में हुई थी। इसका उद्देश्य सर्दियों के मौसम में पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय कलाकारों को एक मंच प्रदान करना था। उस समय पर्यटन सीजन मुख्यतः गर्मियों तक सीमित रहता था, ऐसे में इस कार्निवल ने मनाली को विंटर टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई। शुरुआत में यह आयोजन छोटे स्तर पर होता था, लेकिन समय के साथ यह प्रदेश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित शीतकालीन महोत्सवों में शामिल हो गया। आज यह ...

काल बनकर बरसी बरसात, 44 की टूटी जीवन की डोर

इस बार गिरते पहाड़ और उफनती नदियों ने मचाई तबाही आशियाने तो छीने पर अपनों को भी साथ ले गई तबाही अब तक बरसात में 44 की मौत, 2 लोग लापता गौरीशंकर कुल्लू। अबकी बार बरसात राहत नहीं, बल्कि काल बनकर बरसी। किसी का घर डूबा.... किसी की जमीन बह गई तो किसी का जीवन सदा-सदा के लिए खामोश हो गया। मानसून के इस डरावने कहर ने 44 जिंदगियों की सांसें बंद कर दी। लगातार हुई बारिश से पहाड़ों से लेकर मैदानों तक तबाही का मंजर देखने को मिला। कहीं गिरते पहाड़ों के नीचे सपने दब गये तो कहीं उफनती नदियों में जिंदगियां बह गई। मानसून जो कभी जीवन और हरियाली का प्रतीक था, इस बार मौत और मातम का प्रर्याय बन गया। पीछे रह गये उजड़े घर, सूनी आंखें और खामोशी, जो वर्षों तक प्रभावितों के दिलों को कचोटती रहेगी। जिला कुल्लू में इस तरह की मंजर देखने को मिल रहा है। अबकी बरसात जिला में 44 लोगों को सदा के लिए खामोश कर गया। भारी बारिश के चलते अब तक मानसून सीजन बाढ़, भूस्खलन के साथ फिसलने और सड़क दुर्घटनाओं में लोगों की मौत हुई है। इन हादसों में कई परिवार का घर चलाने वाला तो किसी के घर का चिराग बुझ गया। इसके चलते यह मानसून सीजन परिवार...

कुल्लू नगर परिषद करवाएगा दो सौ कुत्तों की नसबंदी

कुल्लू नगर परिषद करवाएगा दो सौ कुत्तों की नसबंदी नप कुल्लू ने टेंडर प्रक्रिया शुरू की, जल्द होगा कार्य शुरू कोर्ट के आदेश के बाद नगर परिषद ने तेज की कावायद कुल्लू। नगर परिषद कुल्लू ने शहर में भटकते लावारिस कुत्तों की समस्या को लेकर हरकत में आना शुरू कर दिया है। नगर परिषद ने लावारिस कुत्तों की जन्म संख्या पर नियंत्रण करने के लिए कुत्तों की नसबंदी करने की योजना बनाई है। इसके तहत दो सौ कुत्तों की नसबंदी करने के लिए टेंडर लगाने की प्रक्रिया आरंभ कर दी है। हालांकि दो वर्ष पहले भी कुल्लू नगर परिषद ने दो सौ कुत्तों की नसबंदी एक संस्था के जरिए की थी लेकिन अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद फिर से नगर परिषद ने लावारिस कुत्तों की जन्म संख्या नियंत्रित करने की दिशा में प्रयास शुरू कर दिये हैं। नगर परिषद ने शहर के अंतर्गत आने वाले 200 कुत्तों की नसबंदी करने के लिए टेंडर प्रक्रिया आरंभ कर दी है। हालांकि अभी तक नगर परिषद के पास शहर की गलियों में लावारिस कुत्तों की संख्या को लेकर कोई पुख्ता आंकड़ा नहीं है लेकिन दो सौ कुत्तों की नसबंदी करने से काफी हद तक इनकी जन्म संख्या का नियंत्रित करने में सहायता मिल सकेगी...

पार्किंग चला रहे ठेकेदारों के पास फंसे नगर परिषद के 89 लाख रुपये

पहले से ही वित्तीय संकट से जूझ रहा है नगर परिषद कुल्लू नगर परिषद ने संचालन के लिए नीलाम की है पार्किंग मोनाल कैफे, कॉलेज गेट और सा-वा कॉम्पलेक्स के पास मौजूद है पार्किंग गौरीशंकर कुल्लू। वित्तीय संकट से जूझ रहे नगर परिषद को मिलने वाला पार्किंग का धन ठेकेदारों ने दवा रखा है। मुख्यालय की तीन महत्वपूर्ण पार्किंग स्थलों का संचालन कर रहे ठेकेदारों ने इसकी अदायगी नहीं की है। इस कारण नगर परिषद का भी विकास कार्य प्रभावित हो रहा है। नगर परिषद के अधिकारियों की माने तो शहर की तीन पार्किंग चला रहे ठेकेदारों ने अभी तक करीब 89 लाख रुपये की अदायगी नहीं की है। हालांकि नगर परिषद बार-बार ठेकेदारों को यह राशि जमा करने का आग्रह कर रहा है लेकिन ठेकेदारों की ओर से अभी तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिल पा रहा है। हालांकि पार्किंग संचालक ठेकेदारों के पास फंसे इस धन को वसूल करने के लिए नगर परिषद के पदाधिकारियों ने बैठक में भी मामला लाया है और ठेकेदारों को आखिरी अल्टीमेटम देने का फैसला लिया गया है। बैठक में फैसला लिया गया है कि अगर ठेकेदार एक सप्ताह के भीतर यह राशि जमा नहीं करते हैं तो उसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई...

परंपरागत कारोबार को नए सांचे में ढालकर वेद राम ने बनाई अलग पहचान

परंपरागत कारोबार को नए सांचे में ढालकर वेद राम ने बनाई अलग पहचान मोहरे, नरसिंगा का स्मृति कुल्लवी बार्डर लगाकर कर रहे हैं तैयार पीएम नरेंद्र मोदी और पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को भेंट किए जा चुके हैं उनके बनाए स्मृति चिन्ह 60 से अधिक लोगों को जोड़ा है अपने साथ, दिल्ली घाट के साथ देश की प्रदर्शनियों में लेते हैं भाग गौरीशंकर कुल्लू। आधुनिकता के भंवर में डूबते परंपरागत कारोबार को नए सांचे में ढालकर कुल्लू के वेद राम ने अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने अपने पूर्वजों के मोहरे, करनाल नरसिंगा बनाने के पुश्तैणी कारोबार को नया रूप दिया है। वह देवी-देवता स्वरूप के छोटे छोटे मोहरे और नरसिंगा बनाकर इसे स्मृति चिन्ह बना रहे हैं। ये स्मृति चिन्ह अब आलीशान घरों, होटलों और रेस्टोरेंट के साथ सरकारी कार्यालयों की शोभा बन रहे हैं। उनके बनाए स्मृति चिन्ह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भी प्रदेश सरकार की ओर से भेंट किए जा चुके हैं। जबकि प्रदेश में होने वाले बडे़ आयोजनों में आने वाली हर शख्सियत को इस तरह के स्मृति चिन्ह देने की रिवायत भी शुरू हो गई है। ऐसे में वेद राम न...